शनिवार, 2 जून 2012

छोटेलाल यादव

छोटेलाल यादव


 छोटेलाल यादव

 
कुछ व्यक्ति अपने धन-वैभव, बाहुबल, तथा अन्य अनेक प्रचार साधनों की उपलब्धता के कारण अकर्मण्य होने पर भी ख्याति प्राप्ति कर लेते  है. वहीं दूसरी तरफ,  परोपकार की भावना रखने  वाले ऐसे अनेकों  व्यक्ति हमारे बीच   विद्यमानं  हैं   जो सदगुणों से भरपूर तो है ही साथ ही लगन  और  निष्ठां से निरंतर समाज की सेवा करते हैं: लोगों के दुःख दर्द में सदैव सहायतार्थ उपस्थित रहते हैं: परन्तु प्रचार के साधनों की कमी कारण प्रसिद्धि का ऊँचा स्थान नहीं छू पाते.  हम उनके महान कार्यों से अनभिज्ञ रह जाते हैं. चंडीगढ़ में छोटेलाल यादव नामक ऐसे ही एक   व्यक्ति  हैं जो अपने उत्कृष्ट सामाजिक एवं रचनात्मक  कार्यों के कारण बहुत लोकप्रिय हैं. विशेषतयः यदुवंशियों के मध्य. निस्वार्थ समाज सेवा, परोपकार आदि उनके जीवन का लक्ष्य है.विपरीत से विपरीत परिस्थितियों  में धैर्य ना खोना उनकी खूबी है   सदा हंसते-मुस्कराते रहना उनकी जीवन-शैली हैं.और कठिन से कठिन  समस्यायों का  सरल समाधान निकाल लेना उनकी कला है. उनका  बात-चीत का ढंग बहुत निराला है. खबर मिलने पर ह़र किसी  के  दुःख-सुख में तत्काल पहुँचने की भरसक  कोशिश करते है और यथा-संभव सहायता भी करते हैं.आने-जाने वालों तथा जान पहचान वालों के यहाँ  व्याह शादियों आदि के अवसर पर, विशेषकर लड़कियों की शादी के अवसर पर, महीनों  पहले सहायतार्थ उपस्थित हो जाते है. 
 
छोटेलाल यादव का जन्म सन 1956 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में जमखुरी नामक  ग्राम में  एकसुखी एवं संपन्न कृषक परिवार में हुआ. 
इनके पिताजी दो भाई थे. अपने पिताजी के ज्येष्ठ भ्राता (अपने ताऊजी) को वह प्यार से 'बड़े पिताजी'  कहा करते थे. इनका बाल्यकाल  बड़े लाड प्यार में बीता. इनकी प्रारंभिक शिक्षा इनके पिता की देख रेख में गाँव की एक पाठशाला में हुआ.  परन्तु 10 वर्ष की  छोटी आयु में  ही इनके पिताश्री का स्वर्गवास हो गया. उसके कुछ दिन बाद इनके  ताऊजी जी का भी देहांत हों गया. तत्पश्चात  वह अपने ननिहाल चले गये और पढाई जारी रखते हुए  मिडल स्तर की परीक्षा  वहां से पास की. यद्यपि  वह पढाई में प्रतिभाशाली होने के साथ साथ खेल कूद में भी अग्रणी थे,  किन्तु   लगातार अस्वस्थ रहने के कारण पढाई बीच में छोड़कर ननिहाल से अपने घर वापस आना पड़ा.   पिताजी और ताऊ जी की मृत्यु के बाद घर का काम काज सँभालने वाला कोई नहीं था परिणामस्वरूप आर्थिक हालत दिन-प्रति दिन कमजोर होने लगी.  छोटी आयु में ही  घर की  जिम्मेदारियों  का बोझ भी इनको ही उठाना पड़ गया. उन दिनों ग्रामीण-क्षेत्रों  में  रोजगार मिलना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य था. अतएव  परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते  हुए  वह रोजगार जी  तलाश में गाँव से  चंडीगढ़ जैसे आधुनिक और सुंदर शहर में आ गए और भाग्य ने साथ दिया तो  उनको वहाँ सरकारी नौकरी  भी  मिल गयी.   सन 1974 में   एक धर्मपरायण  स्त्री  से  इनका विवाह हो गया. इनके दो पुत्रों के अतिरिक्त एक  सौम्य एवं  सुशील स्वभाव वाली  बेटी भी   है. 

 इनके पिता एक जाने-माने जमींदार थे जिनका अपने क्षेत्र में बहुत मान सम्मान था. वह   हमेशा समाज सेवा में तत्पर रहते थे. पिछड़े एवं गरीब वर्ग  की सेवा करना तो मानों उन्होंने अपने  जीवन का लक्ष्य ही बना लिया था. अपने कीमती एवं  व्यस्त जीवन से  प्रति-दिन कुछ न कुछ   समय निकल कर, गाँव के अनपढ़ व्यक्तियों को निःशुल्क  पढाने का कार्य करते थे. छोटेलाल जी का परिवार धार्मिक  प्रवृति का था, इस  कारण आमतौर पर उनकी चौपाल में गीता,  रामायण आदि का पाठ चलता ही रहता था.  पारिवारिक संस्कर्रों का  प्रभाव  छोटेलाल जी के जीवन पर स्पष्ट दिखाई  देता है क्योकि वह  स्वयं भी अपना  अधिकतर समय समाज सेवा एवं  धार्मिक क्रियाकलापों में ही लगाते है. 

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